बच्चों की शिक्षा में आने वाली रुकावटों वा उनको दूर करने के उपायों के बारे में,

हमारे  कल्याण एस्ट्रोलॉजी  के यूट्यूब चैनल पर आपका स्वागत है. आज की हमारी वीडियो का विषय है  की हम  या हमारे बच्चे कितना पड़ेंगे ,कितनी शिक्षा प्राप्त करेंगे , आगे चलकर शिक्षा का प्रयोग कर पाएंगे या नहीं कर पाएंगे

 इन सब बातों का हमारी कुंडली से क्या रिश्ता है।  आपको हमारी यह वीडियो अवश्य पसंद आएगी क्योंकि इसमें हम आज बात करेंगे बच्चों की शिक्षा में आने वाली रुकावटों  वा  उनको दूर करने के उपायों के बारे में,

 सभी पेरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे खूब  पढ़े परंतु , बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता, ही नहीं ,  और और कई बार तो ऐसा होता है कि दिमाग बहुत तेज होने के बावजूद भी कुछ बच्चे अपनी शिक्षा पूर्ण नहीं कर पाते है और , जीवन में भटक जाते हैं और अगर  शिक्षा पूर्ण भी कर लेते हैं तो उसका उपयोग नहीं कर पाते हैं , कुछ का मन पढ़ाई में नहीं लगता और कुछ बच्चे कम बुद्धिमान होते हुए भी शिक्षा पूर्ण कर लेते हैं व जीवन में अच्छा मुकाम हासिल करते हैं।

हमारी कुंडली में ग्रहों की स्थिति बताती है कि शिक्षा  वा  उनसे  से प्राप्त फलों का स्तर  कैसा होगा। वैसे तो सभी ग्रहों की अपनी भूमिका होती है शिक्षा का सस्तर  निश्चित करने में  परन्तु  मुख्यता गुरु बुध , व  चंद्र की कुंडली में स्तिथि  से हम समझ सकते हैं कि शिक्षा कैसी होगी।

कुंड़ली  का 4TH  व 5TH भाव  हमारी शिक्षा से संबंधित हैं।

गुरु  ग्रह ज्ञान , शिक्षा ,बुद्धि व विवेक का नैसर्गिक कारक है

 बुध बुद्धि का ग्रहण करने की क्षमता का  नैसर्गिक कारक है

चंद्र मन की एकाग्रता का कारक है इन तीनों ग्रहों की सहायक भूमिका होती है शिक्षा को ग्रहण करने में चतुर्थ भाव का कारक ग्रह बुध अथवा चंद्र है पंचम भाव का कारक गुरु है।

इसलिए 4TH  भाव  वा  5TH में बैठे ग्रह ,इन भावो के भावेश ये निश्चित करते है की  जातक की शिक्षा का स्तर  क्या होगा। 4TH  भाव   निश्चित करता है की  शिक्षा कितनी होगी  व 5TH  भाव व भावेश  निश्चित करता कि शिक्षा से प्राप्त  ज्ञान का उपयोग कितना होगा ,

यदि पंचमेश केंद्र या त्रिकोण जैसे शुभ भाव में हो वह उच्च या  मित्र राशि में हो तो  पाप प्रभाव से मुक्त हो ,,शुभ ग्रहो की 5TH भाव या पंचमेश  पर  दृष्टि हो या पंचमेश से युति  में हो या पंचम भाव को देखते हो तो शिक्षा बहुत आसानी से हो जाती है चाहे पढ़ने वाला जातक बहुत बुद्धिमान ना भी हो।

यदि पंचमेश अशुभ भाव  या दुख भाव ,या  पाप कर्तरी हो में अशुभ ग्रह दृष्टि  या युक्त हो या पंचम भाव पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो या  पंचमेश अपनी नीच राशि में बैठा हों या षष्टेश ,अष्टमेश ,या द्वादेश   पंचम भाव में पाप ग्रह हो या  पाप कर्तरी योग हो या ग्रहण योग हो तो  शिक्षा बहुत ही संघर्ष से पूर्ण होती है या पूर्ण ही नहीं होती है बहुत ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है शिक्षा पूरी करने या  करवाने में।

गुरु ज्ञान के स्तर को ऊंचा उठाने का कार्य करता है।

 गुरु ज्ञान को, शिक्षा को , अध्यात्मिकता  को ,जीवन के शुभ कार्य को सही ढंग से करवाने में भी बहुत बड़ा सहायक होता है।  गुरु का  शुभ भावों में होना पाप ग्रह मुक्त होना अच्छी राशि में होना इसी बात की तरफ इशारा करता है कि जातक ज्ञानी तो अवश्य ही होगा भले ही डिग्री  ले  या ना ले ,जीवन में बिना डिग्री के भी कई डिग्री वालों से अधिक ज्ञानी भी हो सकता है.

.गुरु  का किसी भी प्रकार से पीड़ित होना ज्ञान प्राप्ति में रुकावट पैदा करता है.

 बुध ग्रह का अच्छी  उच्च शिक्षा प्राप्त करने में बहुत योगदान होता है बुध ग्रह किसी भी प्रकार से यदि  तो अच्छे भाव में हो अपनी राशि में  हो उच्च की राशी में  मित्र  राशी  में हो मित्र ग्रहो  के साथ  हो , पाप कर्तरी ना हो,6 , 8  , 12 भाव में ना हो तो व्यक्ति तेज बुद्धि वाला तर्क करने वाला बहुत अच्छी स्मरण शक्ति वाला होता है। हाजिर जवाब होता है अपनी तेज बुद्धि से वह सब को अपना कायल बना लेता है व्यक्ति को पता ही नहीं चलता और में उच्च शिक्षा बहुत आसानी से प्राप्त कर लेता है।   कई बार तो ऐसा भी देखा गया कि व्यक्ति कई कई विषयों में डिग्रियां  प्राप्त कर लेता है कहीं विषयों का ज्ञाता हो जाता  है व जीवन में कई माध्यमों से धन अर्जित करता है।

परन्तु बुध  यदि किसी भी प्रकार से शुभ ना हो पाप ग्रह दृष्ट हो , पाप कर्तरी हो केतु के साथ हो नीचे  की राशि में हो 6 ,8 , 12 में हो तो शिक्षा को पूर्ण करने में बहुत परेशानियां आती हैं।

मन की एकाग्रता का सीधा संबंध चंद्र से है यदि मन एकाग्र ना हो भटकता रहता हो  तो  ऐसा व्यक्ति सही ढंग से पढ़ नहीं पाता इसलिए चंद्रमा का सीधा ना सही पर शिक्षा कैसी रहेगी इस बात से संबंध अवश्य है।

 चंद्र यदि 6 ,8 ,12 में हो शनि ,राहु  ,केतु से युक्त हो या दृष्टि में हो या नीच राशि में हो तो ऐसे जातक का मन शांत नहीं रहता और वह   एकाग्र नहीं हो पाता और एकाग्रता   बहुत जरूरी है शिक्षा को सही ढंग से पूर्ण करने में इसलिए चंद्रमा की स्थिति भी अच्छी होनी जरूरी है।

तो ऐसे कोन  से उपाए  जिन्हे अगर हम करते है तो इन तीन ग्रहो को हम शुभ से और अधिक शुभ व अगर अशुभ है तो शुभ  बना सकते है  है ताकि जीवन में  जातक सही से अपनी शिक्षा पूरी भी करे व जीवन में उस शिक्षा से अच्छा  लाभ भी उठा सके।

 अगर जातक किसी भी प्रकार कारण से शिक्षा पर ध्यान नहीं दे पा रहा है तो हम इन उपायों को करके इन तीनों ग्रहों के दोषो  को कम कर सकते हैं जिससे शिक्षा प्राप्त करने में आ रही रुकावटे   व्  बाधाएं दूर होंगी व जातक अपनी शिक्षा पूर्ण कर पाएगा।

 वेसे तो हर व्यक्ति के लिए उपाय कुछ अलग अलग या कुछ ज्यादा या कम हो सकते हैं वह  केवल कुंडली का विश्लेषण करके ही बताया जा सकता है।

 ऐसे जातक जिनका ध्यान  पढ़ाई में नहीं लगता  है  यदि  इन उपायों को करते हैं तो वैसे ही उनकी समस्या का निवारण हो जाएगा।

1  गुरुवार व  सोमवार को शिवलिंग पर जल अवश्य चढ़ाएं।

 2 किसी भी धार्मिक स्थल पर पीली वस्तुएं पहुंचाते रहे जैसे पीला कपड़ा पीली दाल इत्यादि।

3  गुरुवार को पीपल पर जल चढ़ाएं, बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करने का कोई भी मौका ना चुके खासतौर पर दादा दादी   व दादा  दादी  सामान व्यक्तियों का

4  बुधवार को बहुत सारी गायों को बुधवार को हरा चारा खिलाएं।

5  गणेश जी की पूजा करें खासतौर पर बुधवार को गणेश जी पर दूर्वा चढ़ाएं चरणों में दूर्वा रखे।

6  मां , बाप , वा  बहन चाहे बड़ी हो या छोटी पैर छूकर सर पर हाथ रखवा क्र आशीर्वाद ले प्रतिदिन।

7 माँ व  बहन का झूठा खाएं।

8 तन, मन , धन से मां, बहन ,बुआ व्  बेटी की सेवा करें।

9 गले में चांदी का चंद्र पीले धागे में पहने।

10 किसी विधवा आश्रम में जाकर सेवा करें या दानपुण्य  करें।

11 पूर्णिमा को चंद्रमा को अर्क दे।

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पैसों की समस्या आज किसे नहीं है

पैसों की समस्या आज किसे नहीं है हर व्यक्ति जीवन में खूब धन कमाना चाहता है बहुत मेहनत
करने के बाद भी अगर धन का आगमन रुका है तो ,एक साधारण परंतु बहुत ही प्रभावशाली उपाय अपनाकर आप अपने जीवन में रुके हुए धन के आगमन को शुरू कर सकते हैं

कल्याण एस्ट्रोलॉजी के यूट्यूब चैनल परआपका एक बार फिर से स्वागत है।

यह उपाय बहुत ही साधारण है और आसान है व कारगर है पहले के लोगों में यह दिनचर्या का
एक हिस्सा हुआ करता था लेकिन अब वैचारिक युग बदलने के बाद लगभग लुप्त सा हो गया है

पुरुष के घुटनों से लेकर पैरों की उंगलियों तक का भाग शनि का होता है .

व औरत की कलाई से
लेकर हाथ की उंगलियों का भाग शुक्र का होता है

तो पत्नी अगर पति के पैर दबाती है या घुटनों
के नीचे के भाग को हाथों से जब दबती है तो , शुक्र का प्रभाव शनि पर पड़ता है और धन की
प्राप्ति के योग बनते हैं।


आपने अक्सर देखा होगा कि हर धार्मिक तस्वीर में मां लक्ष्मी जी विष्णु जी के पाँव दबाते दिखती है

,माँ लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है तो अगर हम बिना किसी तर्क कुतर्क वितर्क में पड़े इस उपाय को उपाय समझ कर भी करते हैं तो भी घर में सुख शांति व समृद्धि अवश्य आएगी रुका हुआ धन का आगमन शुरू हो जाएगा।
धन्यवाद

Aacharya Ritesh Nagi

9811351049


Make a Good Flow of Money in Your LIFE



MAA  LAKSHMI

रुके हुए धन का आगमन फिर से शुरू करे  



Everyone is facing problem of money in this era, PLS DONT CLICK
Everyone wants to earn and get lot of money in his life,  SO when  after a lot of hard work ONE does not get expected fruit in terms of money he feels disturbed and frustrated .


If you are also feeling the flow of money in your life, in your business is not as per your expectations and hard work then by doing or by practicing this simplest remedy, You can make good flow of money in your life.



This  remedy or we can say practice used to be the part of one of thedaily activities about 20 to 30 years back but with the change of ideologies in the last 30 years this practice  has almost disappeared .






I Ritesh Nagi welcome you on my YouTube channel of Kalyan astrology
Now we talk about the remedy,……



The part of the men’s leg from knees up to the fingers of the feet is of Saturn ,


And from the elbow up to the fingers of the hand of the women is of Venus,




So when a woman presses the part of the leg of men from knees up to the the feet by her hands

it leaves good effect of Venus on the satrun and yog of the flow of money becomes active,





We have often  seen  maa laxmi presses the feet of the lord Vishnu in almost all the pic,

 that is why Maa laxmi is known as goddess of richness ,,


So if we do this practice or we can say remedy in this era without  Falling In The, whether it is logical or illogical we can open doors for  flow of money and prosperity in our life and in our business and in our house







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पांच मिनट में याद करे किस ग्रह के कौन से नक्षत्र है।

पांच मिनट में याद करे किस ग्रह के कौन से नक्षत्र है।

कुंडली फलकथन करते समय यदि हमे ग्रह व उनके नक्षत्र भी याद हो तो फलकथन में और अधिक सटीकता आ जाएगी ,थोड़ा मुशिकल है यह याद रखना की किस ग्रह के कौन से नक्षत्र है ,,पर इस वीडियो को देखने के बाद आप बहुत ही आसानी से यह सब याद कर लोगे। .

रितेश नागी कल्याण एस्ट्रोलॉजी  के यूट्यूब चैनल में आपका हार्दिक स्वागत करता हूं आज हम अपनी इस वीडियो में जिस विषय https://youtu.be/spR8ZeIfIb8पर बात करने जा रहे हैं वह यह है  की किस ग्रह के कौन कौन से नक्षत्र होते हैं किस-किस नक्षत्र का कौन कौन सा ग्रह मालिक है।

हर ग्रह के हिस्से में तीन नक्षत्र आते हैं आपको इस विषय पर यूट्यूब पर कहीं वीडियोस मिल जाएंगी परंतु हमारी यह  वीडियो कुछ विशेष है क्योंकि हम सभी जानते हैं कि किस ग्रह के हिस्से में कौन-कौन से तीन नक्षत्र आते हैं ,इसे याद रखना थोड़ा सा कठिन है कह सकते हैं बहुत कठिन है परंतु करने  पर याद हो ही जाते हैं।

लेकिन हमारी इस वीडियो को देखने के बाद आपको

 किस ग्रह के हिस्से में कौन कौन से नक्षत्र आते हैं। 

 किस ग्रह की महादशा कितने साल की होती है। 

वह किस महादशा के बाद कौन से ग्रह की महादशा आती है। 

   यह भी आपको 5 मिनट में याद हो जाएगा

हमारी कल्याण एस्ट्रोलॉजी  के यूट्यूब चैनल  पर जितने भी वीडियो जो आपको मिलेंगे वह सब आपको पसंद अवश्य आएंगी क्योंकि उनको जहां शोध व अद्ययन के बाद  बहुत ही संक्षेप में  मुख्य विषय को सरलतम रूप में समझाने का प्रयास करते हुए बनाया गया है।  जिससे कि वीडियो देखने वाले का  समय भी बचेगा तथा इस विषय के प्राप्त ज्ञान का उपयोग में प्रैक्टिकल लाइफ में भी कर पायेगा।

अगर आपको हमारी यह वीडियो पसंद आए तो प्लीज हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें बैल आइकन को दबाए जिससे कि हमारे द्वारा हमारे चैनल पर डालेगी वीडियो तुरंत आपके पास पहुंच जाए ,हमारे चैनल को शेयर और लाइक भी अवश्य करें हमारी आज की वीडियो का विषय है ग्रह व  उनके नक्षत्र जो कविता के माध्यम से मैं आपको बताने जा रहा हूं जिससे कि वे आसानी से आपको याद हो जाएंगे।

एक बार पहले हम एक नजर मार  लेते हैं कि किस ग्रह के कौन से नक्षत्र होते हैं। 

 केतु के तीन नक्षत्र      अश्विनी    मघा    मूल

शुक्र  के तीन नक्षत्र       भरणी    पूर्वाफाल्गुनी    पूर्वाषाढ़ा

चंद्र के तीन नक्षत्र         रोहिणी   हस्त    श्रवण 

मंगल के तीन नक्षत्र     मृगशिरा चित्रा और   घनिष्ठा 

राहु के तीन नक्षत्र      आर्द्रा     स्वाति  सत तारका या सतभिषा 

 गुरु के तीन नक्षत्र    पुनर्वसु    विशाखा   पूर्वाभाद्रपद 

शनि के तीन नक्षत्र    पुष्य   अनुराधा   उत्तराभाद्रपद

 बुध के तीन नक्षत्र    आश्लेषा   ज्येष्ठा और   रेवती

हम आशा करते हैं कि आपको हमारी यह वीडियो बस या पसंद आएगी तो आप हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करना बैल आइकन को दबाना वा उसे लाइक करना ना भूलें धन्यवाद

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ग्रहों की अवस्थाये DIFFERENT STAGES OF PLANETS

                               ग्रहों की अवस्थाये 

                DIFFERENT STAGES OF PLANETS

 जब भी हम किसी कुंडली को देखते हैं तो हमें वहां ग्रहों के साथ उन ग्रहो के  अंशों का मान ( डिग्रीज ) भी लिखी हुई दिखाई देती हैं।  यह  ग्रह के अंश का मान ग्रह की अवस्था व उसके बल के बारे में बताता है ग्रहों की अवस्थाओं को सही समझ कर हम कुंडली के फल कथन में सत्यता व  प्रमाणिकता ला सकते हैं।  कभी-कभी हम देखते हैं कि कुंडली को देख कर सीधा ही कह दिया जाता है क्योंकि यह ग्रह उच्च  या नीच का है तो फला फला अच्छा या बुरा फल देगा परंतु जातक को जो फल मिलता है वह कुंडली देखने वाले के द्वारा बताए गए फल का उल्टा होता है ऐसा क्यों होता है आज हम  इस वीडियो में इस कारण को समझेंगे। 

मैं रितेश लगी अपने  KALYAN  ASTROLOGY के यूट्यूब चैनल पर आपका स्वागत करता हूं। you tube kalyan astrology 
इससे  पहले की हम  मुख्य विषय पर आये मेरी आप से प्राथना है  अगर आपने मेरे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया तो प्लीज सब्सक्राइब करना  व LIKE  करना न भूले व राइट  साइड पर बने बैल आइकन को भी अवश्य दबा दें, जिससे कि मेरी वीडियो की नोटिफिकेशन सीधे आप  तक तुरंत पहुंच जाए।you tube kalyan astrology 



ग्रहों की 5 अवस्थाएं होती हैं 

 1 बाल अवस्था

2 कुमार अवस्था


3 युवावस्था 

4 वृद्धावस्था 

5 मृत अवस्था


जिस प्रकार मनुष्य के जीवन में पांच अवस्थाएं होती हैं ठीक उसी प्रकार से ग्रहों की भी पांच अवस्थाएं होती हैं।  अक्सर ऐसा मान लिया जाता है कि यदि ग्रह के 0 डिग्री 1 डिग्री 2 डिग्री लिखा हुआ है तो वह उसकी बाल अवस्था है या मित्र मृत अवस्था है। 

 अगर 28 डिग्री 29 डिग्री 30  डिग्री लिखा है तो यह उसकी मृत अवस्था है परंतु वास्तविकता यह नहीं है।
ग्रहों की अवस्थाएं बताती है , उसको प्राप्त है और ग्रह कुंडली कर सकते हैं
ग्रहों की अवस्थाएं बताती है किस ग्रह को प्राप्त है व्यवस्था को प्राप्त है ब्रेव व्यवस्था यह बताती है कि  कुंडली में उस ग्रह को कितना बल प्राप्त है।


और ग्रह के बल को जान हम  कुंडली का फल कथन सही से कर सकते हैं।
सबसे पहले तो हम यह जान लेते हैं कि ग्रह अगर बाल   या मृत अवस्था में है तो  क्या वह बिल्कुल ही निष्क्रिय हो जाएगा,क्योकि अक्सर ऐसा ही कह दिया जाता है ,,, नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वह कभी भी निष्क्रिय  या फलहीन  नहीं होते हैं।
ग्रह कितना फल देगा यह उसके अंश के मान  पर निर्भर करता है ग्रह अच्छा या बुरा फल देगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रह कुंडली में  कारक  है अथवा अकारक है,, ग्रह अच्छा फल देगा या बुरा फल देगा यह इस बात पर निर्भर करता है की ग्रह की कुंडली में स्थिति क्या है,,ग्रह की युति  किसके साथ है उस पर पड़ने वाली  दृष्टि  किस प्रकार की है।


ग्रह का बल यह बताएगा कि  उस फल की मात्रा कितनी होगी जो जातक को उसके जीवन में उस ग्रह से मिलेगा अच्छा  या बुरा , 

 एक साधारण सा नियम है कि गृह बाल अवस्था में 25%,, कुमार अवस्था में 50%,,, युवावस्था में 100% ,,,वृद्धि अवस्था में 20% ,,,व मृत अवस्था में 5% फल देता है। 


अब  यह अवस्थाएं देखी कैसे जाती है, कुंडली में ग्रहों के साथ राशियों के अंक भी लिखे होते हैं।  ग्रहों की अवस्थाओं को विषम व सम  राशियों के आधार पर देखा जाता है। 

 विषम राशिया है : मेष,, मिथुन,,सिंह ,, , तुला,, धनु,, कुंभ 

 सम  राशिया है : वृषभ,,कर्क ,, कन्या वृश्चिक,, मकर,, मीन 

ग्रहों की अवस्थाएं ग्रहों को  प्राप्त बल रिंकू प्राप्त फल विषम व सम राशियों  में इस प्रकार से देखे जाते हैं। 





विषम  राशि में हो या सम  राशि में 13 से 18 डिग्री में  ग्रह अपना 100% फल देगा।
बुध व  चंद्र  कुमार अवस्था से युवावस्था तक अच्छा व  भरपूर फल देते हैं वह अच्छा है या बुरा है वह एक अलग बात है। 

 गुरु व  शनि युवावस्था से वृद्धावस्था तक भरपूर फल देते हैं वह अच्छा हो  या बुरा
बुधवार कुमार है  व  चंद्र माता अगर हम इन्हे  अपने जीवन में भी उतारे तो हम पाते इन अवस्थाओं  में हम खूब काम कर पाते हैं।  शनि व  ब्रहस्पति  है न्यायाधीश व  गुरु  ये अपनी परिपक्व अवस्था में बढ़िया फल देते हैं।


0  व  29 डिग्री के ग्रह कोई फल नहीं देते ऐसा माना जाता है परन्तु  ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इन दो डिग्रियों को चमत्कारी अंश कहा  गया है क्योंकि यहां से ग्रह  एक नई दिशा में जाना शुरू हो जाता है। 

 ग्रह  अच्छा या बुरा फल  जिस बल जैसा भी  देंगे वह निर्भर करेगा उसकी  अवस्था पर जिसमें वह कुंडली में है। 

 हम जानते हैं कि हम पांच तत्वों से  बने ग्रह भी उन्हीं तत्वों को दर्शाते हैं जिस ग्रह का बल कम हैं उस तत्व की कमी हमारे शरीर में होगी  है।  जिस ग्रह का बाल अधिक है उस  तत्व की अधिकता  हमारे शरीर  होगी।  

 अगर कोई ग्रह आपकी कुंडली में बाल अवस्था में है वह कारक है तो आप उसका रत्न धारण करके उचित लाभ उठा सकते हैं।  सम  व विषम राशियों दोनों में  13 से 18 अंश  तक ग्रह  युवा रहता है।  इस इन दोनों सम व  विषम में 13 से 18  अंश तक ग्रह  पुर्ण बली होता है,, यही वह बिंदु जंहा  ग्रह से सबसे अधिक प्रभाव देता है , अच्छा या बुरा ,,

 बाल अवस्था , कुमार अवस्था में यदि ग्रह कारक है तो उसके रत्नो व  मंत्रों द्वारा पूजा पाठ  उसे द्वारा बल दिया जा सकता है। 

यदि  शनि मकर राशि (सम) में है तो 25 से 30 डिग्री के बीच में मकर राशि मृत अवस्था नहीं मानी जाएगी यह बाल अवस्था  होगी तो आप शनि  को बल देकर उसका भरपूर लाभ उठा सकते हैं। 

 मान लीजिए शनि कुंभ राशि कुंभ राशि (विषम)   में शून्य 0 से 5 डिग्री में है तो शनि बाल अवस्था में है।  शनि का लाभ उठा सकते हैं। 

 मृत ग्रह अगर कारक  लग्न में है तो उसके अधिपति की आराधना करें तो उसका लाभ प्राप्त होगा अकारक है तो उसके रत्न  को धारण  ना करें दान करें पूजा पाठ  करे उस ग्रह के। 



On Fri, Apr 17, 2020 :

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ग्रहों की आपसी मित्रता और शत्रुता ,नैसर्गिक मित्रता व तात्कालिक मैत्री

                       ग्रहों की आपसी मित्रता और शत्रुता 

                                   नैसर्गिक मित्रता व  तात्कालिक मैत्री 

ग्रहों की आपसी मित्रता और शत्रुता को समझे बगैर हम कुंडली का फल कथन सही नहीं कर सकते हैं

फल कथन सही हो ही नहीं पाएगा फल कथन में इतनी प्रमाणिकता नहीं आ पाएगी जितनी होनी चाहिए।  कौन सा ग्रह किसका मित्र है कौन सा ग्रह किस का शत्रु है कौन से ग्रह आपस में सम  है , मतलब ना मित्र है ना शत्रु है, जब तक यह ग्रहों की मित्रता और शत्रुता  सही से ना समझे, तब तक हमारे फल कथन में वह सत्यता  वा प्रमाणिकता नहीं आ सकती जो आनी चाहिए।

हमारे इस ब्लॉग  का मुख्य विषय  है, ग्रहों की आपस में मित्रता और शत्रुता,

इस ब्लॉग से आज आप यही बात बहुत अच्छी तरह से समझ पाएंगे कि कौन से ग्रह आपस में मित्र में कौन से ग्रह आपस में शत्रु होते हैं और कौन से ग्रह आपस में सम  होते हैं।  इन ग्रहो में  मित्रता शत्रुता ऐसे ही नहीं है इन सब के पीछे ठोस कारण होते हैं कुछ मामलों  में तो एक ग्रह जिस दूसरे ग्रह का मित्र होता है या मानता है वही दूसरा ग्रह पहले को मित्र नहीं मानता है या मित्र नहीं होता है।

ग्रहो तीन प्रकार की मित्रता होती है।

1  नैसर्गिक मित्रता 

2  तात्कालिक मैत्री 

३ इन दोनों को जब इकट्ठा करके हम देखते हैं तो बनती है पंचदा  मैत्री

नैसर्गिक मैत्री का मीनिंग है प्राकृतिक मैत्री जो ग्रहों में अपने आप ही अपने स्वभाव के कारण से होती है।

इसी तरह से नैसर्गिक शत्रुता होती है जो ग्रहों में अपने स्वभाव के कारण पहले से ही होती है। 

फिर होती है तात्कालिक मैत्री  व  तात्कालिक शत्रुता

तात्कालिक मैत्री व शत्रुता का मीनिंग है यह मैत्री कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार बनती है व देखी समझी जाती है  फलकथन के समय  के समय

पछता मैत्री में पांच प्रकार की मैत्री बताई गई है

1  मित्र  ,2   अति मित्र   3   शत्रु    ४,,,अति शत्रु     5   सम

इस चार्ट  को देखकर हम बड़ी आसानी से समझ सकते हैं कि कौन सा ग्रह किसका नैसर्गिक मित्र है कौन सा ग्रह किसका नैसर्गिक शत्रु है वह कौन सा ग्रह किसके साथ सम है।

इस  चार्ट से हमें यह पता लगता है कि चंद्र बुध को अपना मित्र मानता है जबकि बुध चंद्र को अपना शत्रु मानता है।

मुख्य रूप से तालिका को मोटे तौर पर याद रखने के लिए दो भागों में बांट सकते हैं 

नंबर 1         सूर्य चंद्र मंगल 

नंबर दो      बुध शुक्र शनि राहु केतु

ग्रह कुंडली के जिस भाव में बैठते हैं वहां के तात्कालिक मित्र व शत्रु भी बना लेते हैं। 

 इन दो उदाहरणों से आप यह बात बहुत ही अच्छी तरह से समझ जाओगे

तात्कालिक मित्र 

ग्रह जहां बैठेगा वहां से उस घर को पहला मानकर वहां से  2, 3 ,4 वह 10, 11, 12 घरों में बैठे ग्रहों से ग्रहों की उस  ग्रह की तात्कालिक मेंत्री होती है।

उदाहरण के लिए बुध यहां पर दूसरे घर में है परंतु हम उसे पहला अगर मान कर चलेंगे तो इसमें दिखाई दे रहे  लाल रंगों से आप समझ सकते हैं कि बुध कौ पहला घर मानकर शुरू करते हैं तो बुध 2, 3, 4,  व  10 11 12 घरों में बैठे हुए ग्रहों के साथ तात्कालिक मैत्री निभाएगा चाहे  वह  उसके शत्रु ही क्यों ना हो।

तात्कालिक शत्रुता 

ग्रह जहां बैठते हैं वहां से 5,  6,,   7,,  8,   9,,  घरों में बैठे ग्रहों से तात्कालिक शत्रुता    बना लेता है। 

 इस कुंडली को देख कर आप समझ सकते हैं कि बुध  दूसरे घर में है, लेकिन  उसे हम पहला घर मानकर चलेंगे व काले रंग से दिखाए गए घरों को देख क्र  आप समझ सकते हैं कि 5,  6,   7,,  8,, 9,, बुध  को पहला घर मानकर चलने पर पांच में छह , सातवें आठवें व नोवे  घर में बैठे ग्रहों के साथ बु ध की   तात्कालिक शत्रुता होगी  चाहे उस घर में बैठे ग्रह  उसके मित्र ही क्यों ना हो। 

एक अन्य उदाहरण से आप समझ सकते हैं कि बुध  चौथे घर में है यहां पर हम बुध की   तात्कालिक मैत्री  व  शत्रुता देखने के लिए बुध  को पहला  घर मान कर चलेंगे तो यहां से हम देखेंगे कि बुध से अगला  पांचवा घर है वह दूसरा घर बन जाता है तो बुध को  पहले घर को मानकर चलते हुए बुध से  की दूसरे तीसरे चौथे  व 10 ,11 १२ वे  में जिन को  की लाल रंग से दिखाया गया है यहां बैठे ग्रहों के साथ तात्कालिक मैत्री होगी चाहे वह उसके शत्रु ही क्यों ना हो। 

बुध  चौथे घर में है लेकिन , लेकिन उसे पहला कर मानकर  5,  6,,, 7,,, 8,,, 9,,  घरो में बैठे ग्रह  जो कि काले रंग से दिखाए गए हैं बैठे ग्रहों के साथ बुध की तात्कालिक शत्रुता होगी चाहे वह उसके मित्र ही क्यों ना हो।

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क्या सभी ग्रह सूर्य के पास पहुंचकर अस्त हो जाते हैं


                क्या सभी ग्रह सूर्य के पास पहुंचकर अस्त हो जाते हैं


अक्सर ऐसा मान लिया जाता है कि कोई भी ग्रह जब सूर्य के साथ होता है तो वह अस्त हो जाता है जबकि वास्तविकता यह नहीं है। ऐसा
हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है, यह सब निर्भर करता है कि सूर्य व उस  ग्रह के बीच में अंशों की दूरी कितनी है, अंश के मान का अंतर क्या है।
सूर्य केवल अपने साथ बैठे हुए ग्रह को ही अस्त  नहीं करते ,सूर्य अपने  से एक घर पहले व एक घर बाद में बैठे ग्रह को भी अस्त कर सकते हैं।


अक्सर  यह मान लिया जाता है कि अस्त ग्रह फल ही नहीं देगा, बिल्कुल ही निष्क्रिय हो जाएगा परंतु ऐसा नहीं है, अस्त ग्रह भी फल देते हैं ,अस्त ग्रह को जब जब  मौका मिलता है वह भी अपने अच्छा फल  को या बुरे फल   फलीभूत करता है… 

अस्त ग्रह भी डालते हैं आपके जीवन पर ...

जब-जब अस्त ग्रह को मौका मिलेगा वह अपना अच्छा या बुरा फल जो भी उस समय उसकी स्थिति के अनुसार ,उस पर पड़ी दृष्टि के अनुसार उसका फल बनेगा वह अवश्य देगा  जो अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी हो सकता है।


जैसे कि हम यह मान लेते हैं कि एक जगह पर एक ही  मंच पर प्रधानमंत्री व उस राज्य का मुख्यमंत्री इकट्ठे खड़े हैं तो उस समय तो वहां पर प्रधानमंत्री की ही चलेगी ,मुख्यमंत्री की नहीं चलेगी परंतु ऐसा भी नहीं है कि मुख्यमंत्री बिल्कुल ही निस्तेज हो जाएगा शक्तिहीन हो जाएगा उसकी शक्तियां उसके साथ ही होंगी जब जब उसे जरूरत पड़ेगी वह  अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है वह थोड़ा सा इधर उधर होकर अपनी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आदेश भी दे सकता है वहां बैठे-बैठे भी वह कई जरूरी कागजों पर साइन कर सकता है, और दिशा  निर्देश दे सकता है उसको रोका नहीं जाएगा।






हां यह भी ठीक है कि क्योंकि प्रधानमंत्री वहां पर है तो चलेगी उसकी ही लेकिन कुछ समय बाद जब परिस्थितियां बदल जाएंगी प्रधानमंत्री वंहा  से चले जाएंगे या मुख्यमंत्रि उस जगह  को छोड़कर दूसरी जगह जाकर बैठ जाएंगे या वहां से चले जाएंगे तो उसके पास उसकी ताकत फिर से वापस आ जाएगी और वह अपने सारे कार्य को ठीक तरह से अंजाम दे सकेगा।
परंतु यहां पर यह भी बहुत समझने की जरूरत है कि ग्रहों की जो स्थिति लग्न में बन गई वह उसी समय डिसाइड हो गया कि कौन सा ग्रह कितने प्रतिशत फल देगा अच्छा देगा या बुरा देगा उस पर किस ग्रह की दृष्टि या पड़ रही है गोचर में स्थितियां बदलेंगी तो ग्रह  उसके अनुसार अपने फल को फलीभूत करता रहेगा।



अब आते  है मुख्य बात पर राहु केतु सूर्य के साथ अस्त  नहीं होते अपितु सूर्य को ही ग्रहण लगा देते हैं बुध अस्त होने  पर भी अच्छा फल प्रदान करता है।  अन्य ग्रहो की दृष्टियों  के अनुसार उसके फल में वृद्धि तेजी कमी आती रहती है। 

अब  यह भी जान लेते हैं कि कौन सा ग्रह कितने अंश पर होने पर अस्त होते है या कितने  अंश से अधिक होने पर नहीं अस्त होते  है। 

 आपको दो चित्रों के माध्यम से बात समझाई जाएगी तुरंत ही समझ आ जाएगी पहले हम यह जान लेते हैं कि कौन सा ग्रह कितने अंश तक अस्त होता है



अगर इस दूरी या  दोनों ग्रहो के अंशो के मान का अंतर् इसके बराबर या इससे अधिक  तो ग्रह अस्त नहीं माना  जायेगा।
कुंडली उदाहरण 



सूर्य केवल अपने ही घर में बैठे ग्रह को अस्त नहीं करते एक घर आगे बढ़कर पीछे के किराए को व्यस्त कर सकते हैं परंतु गणना करने का तरीका बदल जाएगा







अस्त ग्रह का यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है की अस्त ग्रह  बिल्कुल ही प्रभावहीन हो जाएगा

 मान लीजिए प्रिंसिपल कक्षा में आ गए तो उस समय उनके सम्मान में उस कक्षा का उपस्थित अध्यापक भी खड़ा हो जाएगा पर ऐसा नहीं है कि मैं प्रभावहीन हो जाएगा जब तक प्रिंसिपल बोलेगा तब तक सभी सुनेंगे पर बाद में दोनों प्रिंसिपल अध्यापक भी  सलाह मशवरा कर सकते हैं।  अगर प्रिंसिपल अध्यापक के बीच में पहले से अच्छी बनती है तो दोनों की बातचीत का निष्कर्ष अच्छा  निकलेगा  अगर दोनों एक दूसरे को ना सामने और ना ही बाद में काटेंगे और अगर दोनों में से किसी भी कारण से नहीं बनती तो उनकी बातचीत का मंत्रणा का फल जो हर हालत में उतना बढ़िया नहीं होगा जितना कि हो सकता था। 

 एक और उदाहरण लेते हैं एक बीटा बहुत बड़ा अफसर  है उसकी खूब चलती है लेकिन जब भी मैं पिता के बहुत करीब होगा आपने  रोब  वाले रवैया को कंट्रोल कर लेगा उसे  पिता का सामने  रोब छोड़ना पड़ेगा परंतु मौका देखते ही उसके अंदर का ऑफिसर  फिर जाग जाएगा अस्त  ग्रह भी बिल्कुल इसी प्रकार से फल   देते है। 

वास्तु की कि कुछ इन साधारण सी टिप्स को ध्यान रखकर हो सकते हैं मालामाल 

वास्तु की कि कुछ इन साधारण सी टिप्स को ध्यान रखकर हो सकते हैं मालामाल 

 मैं अपने जीवन में बहुत से विद्वानों को मिला एस्ट्रो वास्तु न्यूमरोलॉजी के विषयों पर गहन मदन हुआ अंत में पर पहुंचा की वास्तु के अनुसार बहुत सारे बदलाव या बहुत सारे उपाय करना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता तो उन विद्वानों ने जो बातें मुझे बताई वह मैं विस्तार से आपको यहां बताने जा रहा हूं अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हैं इन्हें जीवन में अपना लेते हैं तो आप अपने घर से रूठी हुई सुख समृद्धि व शांति को वापस ला सकते हैं

आप अगर नया मकान बना रहे हैं तो आप किसी वास्तु एक्सपर्ट से सलाह ले सकते हैं मास्क अनुसार अपने कार्यस्थल का निर्माण कर सकते हैं परंतु अगर हमारा मकान या कार्यस्थल पर आना है वह चाह कर भी हम उस में तोड़फोड़ नहीं कर सकते जाती है तो बहुत बड़ी आरती खानी होती है और अगर किसी प्रोफेशनल से चला लेते हैं तो तीसरा उसके द्वारा दिए गए यंत्र व अन्य वस्तुएं हमें वहां पर से खरीदनी पड़ती हैं उनका ध्यान रखना पड़ता है

अगर हम उनका ध्यान सही ढंग से नहीं रख पाते हैं तो मन में एक बहन पैदा हो जाता है कि पता नहीं हमने सही ढंग से इनका रखरखाव नहीं किया जिसकी वजह से हमारा जो कार्य है सफल नहीं हो रहा है या धन का आगमन नहीं हो रहा है फिर उन महंगी खरीदी यंत्रों का वस्तुओं का ध्यान भी रखना पड़ता है यह सब इतनी आसानी से संभव नहीं होता तो सिटी बताने जा रहा हूं जिन्हें अपनाकर आप बहुत ही आसानी से कुछ साधारण से बदलाव कर कर अपने जीवन में वास्तु के अनुरूप अच्छे फल प्राप्त कर सकते हैं

सबसे पहले तो हमें यह पता होना चाहिए कि हमारे घर की दिशा किस तरफ है जिससे कि आप इस चित्र के माध्यम से बड़ी आसानी से समझ सकते हैं

तो अब हम बात करते हैं उन कुछ मुख्य बातों की जिन्हें अगर हम ठीक कर लेते हैं कुछ को भी ठीक कर लेते हैं तो काफी हद तक हम उन वास्तु दोषों से बच जाते हैं जिनकी वजह से धन का आगमन बाग ग्रह शांति के बीच में ग्रह शांति सही ढंग से स्थापित नहीं हो पा रही है

सबसे पहले हम बात करते हैं किचन की किचन हमेशा पूर्व दिशा में होनी चाहिए

वॉशरूम इत्यादि प्लाट की साउथ दिशा में होनी चाहिए

पानी का टैंक नॉर्थ ईस्ट दिशा में होना चाहिए

छत बिल्कुल साफ रखें छत पर पक्षियों को बिल्कुल कुछ भी खाने को ना डालें

सोते समय सर दक्षिण की तरफ होना चाहिए या फिर पश्चिम की तरफ

घर की दहलीज बिल्कुल साफ रखें घर का फ्रंट साफ रखें दरवाजों पर काला नीला पेंट बिल्कुल भी ना करवाएं

घर के मुख्य द्वार के ऊपर काली माता की गणेश जी की या स्वास्तिक का चिन्ह लगाएं

घर साफ सुथरा रखें नियमित सफाई करें धूल मिट्टी हटाए जाले ना लगने दे

साउथ वेस्ट में शयनकक्ष होना चाहिए कबाड़ नहीं होना चाहिए सजने सवरने की चीजें रख सकते हैं

स्टोरेज दक्षिण दिशा में होनी चाहिए

पैसे साउथ वेस्ट दिशा में रखें और पैसे रखने वाले स्थान का मुंह उत्तर की तरफ खुलना चाहिए

गुरु को अच्छा करने के लिए तिल के तेल का दिया उत्तर दिशा में खुली जगह पर सावधानी से नियमित जलाएं

अगर घर में कलेश बहुत है तो दक्षिण दिशा में छोटे छोटे काले पत्थर रखे मैं सुबह शाम उन्हें हल्दी का टीका लगाएं

अगर स्वास्थ्य से संबंधित परेशानी है तो पूर्व दिशा को साफ रखें इस दिशा की दीवारों को गलती से भी काला नीला व डार्क कलर ना करवाएं

खाने पीने की चीजें पूर्व दिशा में रखें माइन के बीच में साबुत बादाम वा  लांग अवश्य रखें

घर में लाल चंदन रखें  इस चंदन को गिस कर तिलक सभी घर के सदस्य लगाएं

घर में मंदिर होना ही नहीं चाहिए

अगर है तो उसका मुंह पूर्व दिशा में या पश्चिम दिशा की तरफ होना

चाहिए

मंदिर में मूर्तियां होनी ही नहीं चाहिए अगर रखनी है तो उनका साइज 6 इंच से अधिक नहीं होना चाहिए

उत्तर दिशा की तरफ कोई भी भारी सामान ना रखें साफ सुथरा रखें सुगंधित प्राकृतिक फूल लगाएं व सुगंधित सुगंधित वस्तुओं का छिड़काव समय-समय पर करते रहे

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सूर्य से जुड़ी अहम बाते

सूर्य से जुड़ी अहम बाते
August 20, 2019
सूर्य से जुड़ी अहम बाते
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सूर्य नीच का है बुरे भावों में है गलत ग्रहों से दृष्ट है कम डिग्री का है ऐसा सूर्य जिसकी भी कुंडली में होगा उनमें इनमें से कई लक्षण पाए जाएंगे ।
कोई एक कॉमन बात तो यह होगी कि यह किसी भी बात से ,किसी भी व्यक्ति से बहुत ही जल्दी बहुत ही अधिक प्रभावित हो जाते होंगे ।
और अपनी इस बात को यह मानेंगे भी नहीं आंखों पर चश्मा छोटी उम्र में ही लग जाएगा या तो पिता के साथ बनेगी नहीं या फिर
पिता की स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा या फिर पिता छोटी आयु में ही छोड़कर चले जाएंगे ।
उच्च का सूर्य या
आच्छा सूर्य एक धर्म पर चलने वाला राजा
नीच का या कम डिग्री का सूर्य एक अधर्मी राजा,मान लो दोनो में बहस या कोई और युद्ध हो गया ,पहले 90% तक धर्मी राजा को ऐसा लगेगा वो हार गया,पर आखिर में बाजी ऐसे पलटेगी की अधर्मी राजा चारो खाने चित हो जाएगा,कुदरत साथ देने पर जब आएगी तो धर्म को हारने नही देगी,सारि चा ले पलट कर रख देगी अधर्मी राजा की ,
आप लाख काबिल हो आप किसी को प्रभावित नहीं कर पाएंगे ,मन में हमेशा ही बेचैनी बनी रहेगी सब कुछ पाकर भी ऐसा लगेगा कि जीवन में कुछ नहीं पाया है आ
तृप्ति की भावना हमेशा ही मन में रहेगी।
ऐसे लोग जिसका भी सिर्फ इतना ही सुनते है कि उसके पास बहुत पैसा है ,बस वही पर उस वियक्ति से प्रभावित हो जाते है ,बिना इस बात की गहराई में जाये “की ये बात सत्य भी है या नही
,या वो पैसा लोन का है ,जो वो वयक्ति भविष्य में अगर वापिस नही करता तो जेल भी जा सकता है
या ,फिर इस वियक्ति ने यह सारा पैसा 20 से 30 % पर लिया है जो भविष्य में इस वियक्ति की आत्म हत्या का कारण बनने वाला है ,सब जानते हुए या बिना जाने भी ये बस उस वयक्ति से प्रभावित हो जाते है
ये सवसे अधिक प्रभावित होते है उन लोगो से जो वास्तव में गलत है ,नेगटिव है ,वस दिखा ऐसे रहे है जैसे कंही के राइस है ,बहुत ज्ञान है इनके पास
ऐसे लोग अपनी ग्रहस्थी में आग उन गलत हरकतों ,व कारणों से लगा कर रखते है ,ओर उन्हें सुलगायी रखते है ,जो कि वाकया में ही गलत है,ओर इन्हें पता भी होता है कि ये बाते गलत है,
ऐसे लोग दुसरो से हर बात का सबूत मांगते है,ओर अपनी गलत बातो के सबूत मिलने के बाद भी नही मानते,
यह सब बाते मेने हजारो कुण्डलिया देखने के बाद अपने अनुभव के आधार पर कहि है,
ऐसे लोगो को तुरंत उपाय कर के अपने ख़राब सूर्य को सही करना चाहिए,वरना क्लेश के कारण होंगे आप पर थोपेंगे दुसरो पर
ओर जो लोग किसे से भी किसी भी हालत में प्रभावित नही होते इसका मतलब है की ना केवल उनका सूर्य आच्छा है बल्कि अन्य मित्र ग्रहो के साथ भी है, चाहे गलत भाव मे हो ,

सूर्य आत्मा है ,आत्मा उस परमात्मा का अंश है ,अच्छे सूर्य वाले परमात्मा व उसके द्वारा रची गयी अनुभूत प्राकृतिक पहेलियों व रहस्यो के अलावा किसी ओर बात से प्रभावित नही होते, कोई कितना भी पैसे वाला हो ज्ञान वाला हो ये प्रभावित नही होंगे
वन्ही खराब सूर्य वाले सामने रखे अपने सोने को छोड़ के दूसरे के पीतल से प्रभावित हो जाएंगे और हर बार ऐसा होगा,
पति व पत्नी दोनों ने से एक का सूर्य कमजोर हो ,व दूसरे का अच्छा हो तो जमीन आसमान का वैचारिक मतभेद होगा ,जो रोज कलह का कारण बनेगा,
कमजोर सूर्य वाला ये बात जानता होगा कि जिसका सूर्य सही है वो बात सही कह रहा है ,पर मानेगा नही ,
खराब सूर्य वाले सूर्य की वस्तुयों का दान करे,सूर्य के मन्त्र om suraya नमः का जाप करे,
पूर्ण सूर्य मन्त्र कंठस्त करे ,
सभी कहते है अच्छे ग्रहो की वस्तुयों का दान न करे,में नही मानता,आप उनका भी दान करे,ओर अगले जन्मो के लिए पूण्य अर्जित करे, जो करोड़ो गुना हो कर मिलते है,।
उदारण के लिए किसी भी कारण से आप को कहा जाता है कि पानी का दान नही करना ,मतलब सामने कोई पानी मांगे ओर आप न दे,तो इससे बड़ा पाप कोई और हो ही नही सकता ।
रितेश नागी
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